जिंदगी क्या है,
जिंदगी एक कठपुतली है,
जिसकी रस्सी को हम खुद,
हांथो में दुसरो के दे देते है,
इसे बदलने के लिए नई सोच,
पुराने संस्कार को समझना होगा,
अपने अंदर के विज्ञान को समझना होगा,
गलतियां तो सब से होती है,
किंतु खुद किये गए गलतियों को,
अपने ज्ञान से समझना होगा,
अपने अंदर के अहंकार को,
अपने ही ज्ञान से तोड़कर,
अपने महान को समझना होगा,
कोई भी महान हो सकता है पर पूर्ण नही,
इसीलिए पूर्ण को समझना होगा।
वर्तमान को स्वीकार करना,
ईश्वर को स्वीकार करना,
पूर्णत्व को स्वीकार करना।
आरम्भ और अंत के साथ,
अनंत को स्वीकार करना ही
जिंदगी की सच्चाई है।
जिंदगी एक कठपुतली है।
जो जिंदगी को परिभाषित करती है।।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें